Author: Aishwarya

  • सूरज की किरणों से भरी धरती

    सूरज की किरणों से भरी धरती

    सूरज की किरणों से भरी धरती,
    आज मैं करूँगी अपनी कविता की परिचय।

    उठो, आगे बढ़ो, मेरी बेटियाँ,
    आपकी ताकत निहारो, आपकी पहचानो।

    सृजनशीलता की पुकार सुनो,
    खुद को स्वतंत्र करो, अद्वितीय विचार सजाओ।

    मेरी कविता है अनूठी, विचारों का आकाश,
    पुरानी धाराओं से निकलो, नई दिशाओं में आगे बढ़ो।

    साहस से पूर्ण है ये कविता,
    मन की अगुआई ले, सपनों की ऊंचाई छू जाओ।

    भावों के संग्राम की गर्जना सुनो,
    विचारों की लहरों में उड़ान भरो।

    संगीत की तारांगों में बहो,
    अपनी वाणी से जग को रंगीं भरो।

    तुम अनूठी हो, तुम विशिष्ट हो,
    ये कविता तुम्हारी विजय की प्रेरणा हो।

    अद्भुत रचनात्मकता से सजी तुम्हारी छाप,
    तुम जीतोगी इस प्रतियोगिता में, स्वप्नों की ऊंचाई का अपनाप।

    उठो, आगे बढ़ो, मेरी बेटियाँ,
    करो ये कविता अनूठी, विचारों की आदर्श।

    तुम विजय को गले लगा लो,
    ये कविता हो तुम्हारी स्वतंत्रता की पहचान।

    -ऐश्वर्या

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