Author: Ajay

  • आज़ाद हिंद

    आज़ाद हिंद

    सम्पूर्ण ब्रहमण्ड भीतर विराजत  !

    अनेक खंड , चंद्रमा तरेगन  !!

    सूर्य व अनेक उपागम् , !

    किंतु मुख्य नॅव खण्डो  !!

     

    मे पृथ्वी भूखंड !

    अति मुख्य रही सदा   !!

    यहा पर , सप्त द्वीप !

    जॅहा पर , उन समस्त !!

     

    द्वीप मे प्रमुख रहा  !

    भारत का द्वीप सदा !!

    यहाँ पर , भारत को !

    नमाकन कर सोने की !!

     

    चिड़िया ,हिंदोस्ताँ व भारत !

    की उपाधि दे डाली !!

    भारत मेरा प्रतिभाशाली रहा !

    पृथ्वी के आरंभ से  !!

     

    ही तो कमी यहाँ !

    किस बात की रही !!

    महा कवियो मे महाकवी !

    कालिदास , माहाऋषि मे मःआॠषी !!

     

    बाल्मिकी आदि समान महारत्न  !

    पनपे , रचे जिन्होने महाकवय  !!

    सहित रामायण सम्मुख भाती !

    – भाती के ज्ञानवान रत्न  !!

     

    तब पर भी कमी !

    कदाचित् कहाँ थी , सोने !!

    की चिड़िया के पर !

    रोंद कर लूट रहा !!

     

    था ,उसे कोई न कोई  !

    मानो बन के हमराही  !!

    जिस भारत ने संसार  !

    को शून्य व दशमलव !!

     

    दे कर गिनती सिखाई !

    आर्यभट्ट -. चाणक्य की निंदा !!

    नाही , ओषधि मे महात्मा !

    बुद्ध बने जगत के !!

     

    अनुरागी ,योग व ओषधि !

    से करत चले गये !!

    दूर समस्त बुराई , आज !

    इस भारत की दुर्गति !!

     

    देखो के प्रत्येक रास्ट्र !

    अभी भी लूटना चाहता  !!

    हो इसे भाई , वह !

    समाए क्या कम था !!

     

    जब जो भक्ति काल !

    से आदि काल से !!

    लेकर आधुनिक काल तलाक़ !

    डच-डेनिश , मुगल-हीमायू !!

     

    अकबर – बाबर ने लूटा !

    से .क्षतिग्रस्त करा भारत !!

    के प्रत्येक राज्य के !

    कन- कन को , जैसे  !!

     

    हो बचा  कही कोई !

    अंदेशा नहीं तब  कर  !!

    भी ,पनपे भारत के !

    भाषीय स्तर पर धुरन्दर !!

     

    महाकवी तुलसीदास ,सूरदास व !

    कबीरदास तो सभी अब !!

    भी ईर्षा क्या कम !

    थी जो , आगमन अंग्रेज़ो !!

     

    का हो गया, सोना !

    उगलने वाली माटी को !!

    अफ़सोस तब पर भी !

    न हुआ , ब्रहमण्ड -क्षत्रिय  !!

     

    शुद्रा व वैश्य क्या !

    बैर रखते जब चोट !!

    पड़ती थी खानी अंग्रेज़ो !

    की , गुलामी के दिवस  !!

     

    मे क्या चोट थी !

    वह कुछ नहीं दर्द !!

    तो कायम रही ह्रदाए !

    के भीतर , नस्तर समान !!

     

    चूबा रहे थे सर्यंत्र !

    स्वयं का मानो यह !!

    रास्ट्र हो,उनका ससुराल !

    बहन-बेटी की इज़्ज़त !!

     

    से खेल, भाइयो के !

    खून का कर रहे !!

    थे व्यापार , वह तो !

    क्रांतिवीर थे जिन्होने गरमदल !!

     

    व नरमदल रूप मे !

    कई सारे अथक प्रयास !!

    करे , राष्ट्र की आज़ादी !

    हेतु कई वीर मृत्यु  !!

     

    के घाट जले , फाँसी !

    चड़े अजर-अमर मंगल पांडे !!

    राजगुरू -सुखदेव व भग्त सिह  !

    न जाने आज कहाँ !!

     

    गये जो बच गये !

    वे तो मानो आज !!

    भी राजनेताओ के रूप  !

    मे दीमक बन अंग्रेज़ो !!

     

    के शासन का पालन  !

    ही करते जा रहे  !!

    है , भारतीय सभ्यता को !

    पश्चिमी सभ्यता ने लूटा !!

     

    अब नग्नता उमड़ रही !

    यहाँ पर है , पन्द्रह !!

    अगस्त १९४७ की पहचान  !

    करू तो करू किससे !!

     

    जब आज भी राष्ट्र !

    स्वयं के जातिवाद के !!

    गुलामी से जूज रहा है !

    अंबेडकर जी के क़ानून !!

     

    पस्त होते दिख रहे !

    हिंदू मुस्लिम सिख व ! !

    ईसाई समस्त कोई दुर्जन !

    बन आपस मे लड़ !!

     

    रहा , आज भी खून !

    ख़राबा , बलात्कार व नारी !!

    पर अत्याचार है , बंधुवा !

    मज़दूरी मे बँधा वह !!

     

    बालक मजदूर बेबस व !

    लाचार है, क्या खूब !!

    पदवी है , मेरे राष्ट्र !

    ” आज़ाद हिंद ”   की के !!

     

    ये आज़ाद हो कर !

    भी पूर्ण रूप से लाचार !!

    है , अपाहिज व बीमार  !

    है , ग़रीबो का शोषण !!

     

    थाना कचहरी मे मानो !

    अमीरो की सरकार है !!

    योग्य व्यक्ति लगता ठेला !

    अग्यानी व्यक्ति करता  देश !!

     

    का व्यापार है , कोन !

    कहता की आज १५ !!

    अगस्त २०१६ तलक मे भी !

    हमारा हिंदोस्ताँ आज़ाद है !!

     

    यह तो बेबसी मे !

    डूबता जाता किंतु लगता !!

    किसी ने मुख्य मंत्री रूप !

    मे इसे संभालना चाहा !!

     

    तो भी उस दीलेर !

    पर लगे  कई इल्ज़ाम !!

    है , कुरीतीयो मे डूबा !

    विष को जहन मे !!

     

    रख जूबा से उडेलता !

    ख़ाता रास्ट्र की व !!

    अलकता अन्य की वह !

    दुराचार व पाखंड मृत्युदंड !!

     

    के काबिल भया ,अब्दुल  !

    रहीम  , यह समस्त अंश !!

    ” आज़ाद हिंद ” के रहे !!

    न जाने क्यो आज !!

     

    भी ह्रदय ,भारत के !

    आज़ाद होने पर भी !!

    रूदन कर रहा !!!

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