Author: Akanshi Mittal

  • Aravalli Range

    रहते रहते पहाड़ों के बीच,
    मुझे किसी के सिसकने की आवाज़ है आई,
    जब देखा सिर उठा कर अपने चारों ओर,
    तो जाना पहाड़ों के रोने की आवाज़ है आई…

    अरावली का हर पहाड़,
    पूछ रहा था बस एक ही सवाल,
    क्या किया है हमने ऐसा,
    जो पूरी अरावली रेंज (Aravali Range) का हाल हुआ बे-हाल?
    पूरे उत्तर भारत को सुन्दर हम बनाते हैं,
    पशु-पक्षियों और पेड़ों का जीवन हम बचाते हैं,
    तभी तो पर्यटक आकर्षित हो यहाँ छुट्टियाँ मनाने आते हैं,
    पर अफ़सोस तुम्हारे ही घर, होटल और रिसॉर्ट्स (resorts) के लिए हम काट दिए जाते हैं;

    हम ही नहीं रहे तो यहाँ क्या बचेगा,
    कुछ समय बाद अरावली रेंज का नाम सिर्फ़ इतिहास की किताबों में ही दिखेगा,
    वक्त है अब भी सम्भल जाओ,
    इस ख़ूबसूरती को नष्ट होने से बचाओ,
    हमारी तुम सबसे बस है यही गुज़ारिश,
    काट कर हमें यूँ…
    प्रकृति को ना करो लावारिस।।

    – आकांक्षी मित्तल

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