भटकते फिर रहे हैं जंगलों में शांति के पंछी, इन्हें दो आसरा मत व्यर्थ में बातें बनाओ तुम, सरकते जा रहे इन पेड़ों के घरोंदों से ये पंछी, इन्हें दो सहारा मत अर्थ की रातेँ […]