Author: Alok Ranjan

  • नया साल कुछ कह रहा है।

    नया साल कुछ कह रहा है।

    ह्रदय में अमृत धार लिए,
    कोई सरल मनोरम बह रहा है
    तू देख जरा अंतर्मन से,
    ये नया साल कुछ कह रहा है।

    माना पीछे कुछ छूट गया,
    माना कोई अपना रूठ गया
    चलो माना जिसमें “अक़्श” दिखा
    वो ही आईना टूट गया ।।
    जो छूट गया उसे पाना तुम,
    जो रूठा उसे मनाना तुम,
    वो टूटा है उसे जाने दो,
    आईना नया ले आना तुम।

    उन बातों को मुख पे लाओ,
    जो ह्रदय में तेरे रह रहा है,
    तू देख जरा अंतर्मन से,
    ये नया साल कुछ कह रहा है।।
    -Alok Ranjan_

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