उसका हुस्न – ए – तसव्वुर जैसे ज़िंदगी थमी हुई है ज़ियारत -ए -रुख़-ए -अनवर आज सुबह ही हुई है उसकी सोहबत  से फ़ुरक़त हैं  ‘मियाँ ‘ फिर भी दयार -ए -दिल की क़िस्मत तो […]

कैसे भुला दूँ खाना -ए-दिल से कैसे भुला दूँ उसकी ज़ीशान निगाहें कैसे भुला दूँ उसकी रेशमी ज़ुल्फें मुमकिन नही भुलाना अब उसकी यादों को   जब  थी करीब न किया तवज्जो उसके प्यार का […]