Author: Amit tanwar

  • मस्ज़िद गए कभी कभी उस रब के घर गए

    मस्ज़िद गए कभी कभी उस रब के घर गए
    तब भी नही मिला कोई रस्ता तो मर गए
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    1:-बदनाम तो बहुत हुए पर खुश भी हम रहे
    हम वो फकीर है जो इबादत ही कर गए
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    2:-हम तो कुछ इस तरह के इंसान बन गए
    तुफान से लड़े तो प्यार में बिखर गए
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    3:-नफरत हमें हर एक मुहब्बत से हो गई
    मंजिल नही मिली तो सफर में ठहर गए
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    4:-मै इस तरह मरा हूँ कि ड़ुबाने तक जिआ
    पर जब मरा रकीब़ मुझे देखकर गए
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    5:-जब माँगने गए दरो दहलीज़ पर गए
    फिक्र ए मआश के लिए हम दर ब दर गए

  • नादान दिल

    जिस भी किसी पर गई नजरे उसी का हो गया
    नादान सा ये दिल है मेरा हर किसी का हो गया
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    1:- किस शर्त पर मै अब तुझे दिल में बसा के प्यार दूँ
    हर शख्स की नीयत यही के दुश्मनी का हो गया
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    2:- हमने खुदा का तरह पूजा था उसे जब इश्क में
    वो तो खुदा था और आखिर वो सभी का हो गया
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    3:- वो हर कदम पर भी मुझे ठुकरा दिया करती रही
    वो मेरी तो हो ना सकी मै शायरी का हो गया
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    4:- बाजार में वो शख्स आखिर यूँ ही तडप कर मर गया
    ये दौर अब वो है कि साहिब बुजदिली का हो गया
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    5:- थक सा गया हूँ जिन्दगी तुझको समेटे जा रहा
    ये दिल तो कब का हारकर अब खुदकुशी का हो गया
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    6:- बस इस कदर हारा हूँ मै जिन्दगी से येँ अमित
    ये तो मेरी ना हो सकी मै जिन्दगी का हो गया

    ?:-अमित तँवर

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