आदमी आदमी हैं
हर जगह
पर क्या कभी
एकता आयेगी
रात भी,
बात भी,
बीत ही जायेगी
पर क्या कभी
राह कोई आयेगी
Author: Amrita Dabi
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आदमी आदमी हैं
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बैठ गया हूं मैं
थक कर अब बैठ गया हूं मैं
तुम्हें भुलाना कुछ मुश्क़िल हो रहा है -
मैं निःशब्द था
उन जानवरों के सामने मैं निःशब्द था
क्योंकि
मैं भी एक इंसान था ।