Author: Amritanshi Pandey

  • विश्व समर जीत

    जाग हे पार्थ जाग तू,
    दे काल को अब मात तू,
    काल के कपाल पर अमिट रेखाएं खींच,
    अब तू काल समर जीत।
    स्वयं के सम्मान हेतु ,
    विश्व के कल्याण हेतु ,
    अपने अंदर के ज्वाल पुष्प को तू सींच,
    अब तो दिव्य समर जीत ,
    अब तो विश्व समर जीत ।।
    हो रही हूंकार है ,
    उठ रही तलवार है,
    गांडीव के बाण से ,
    विश्व के इतिहास में ,
    गाथा नवीन लिख।
    उड़ उड़ान बाज की ,
    हुंकार हो वनराज की,
    हर संकट में बने कठिनाई तेरी मीत,
    अब तू धर्म समर जीत।
    अब तो विश्व समर जीत।।

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