एक सवाल सा अक्स’ हौले से कुछ बदला है एक क़तरा अभी छलका है बड़ी मुद्दत से पलकों पर था वो आँसू जो ढलका है एक अनकहे किस्से सा हूँ अचानक उठी हिचकी सा हूँ […]

थोड़े हम अमीर थे एक दिल के थोड़े हम गरीब थे एक दिल के थोड़ा मुस्कुराते थे टुकड़ों में थोड़ा गुनगुना लेते थे मुखड़ों में कभी सौदागर थे हंसी के कभी रो लेते थे पीछे मुड़ के कुछ बदनाम हैं दर्द […]