अवसाद का विक्षोभ नीरव, चपल मन का क्लांत कलरव देखता पीछे चला है लगा मर्मित स्वरों के पर । शुष्क हिम सा विकल मरु मन, भासता गतिशील सा अब, भाव ऊष्मा जो समेटे बह चला […]