न था मित्र कोई सखा मेरा जन्मा था वो बनके दोस्त मेरा। पहली दफा मुस्कुराया वो, मन प्रफुल्लित हुआ था मेर। जैसे गुड़हल के पुष्प से निकली हो एक कली और लुटाई हो उसने सुंदरता […]