ashoksingh.990's Posts

होली

जीवन जीना एक कला है प्रतिपल एक रंगोली है गर मानवता है दिल में तो प्रात-रात नित होली है ।। वसुधा अंबर में संगम का माध्यम दिनकर होता है तिल होता है चन्दा में भी फिर भी शीतल होता है।। विष से व्याप्त भुजंग है होता चन्दन की उस डाली पर पर शीतलता की वह भाषा छाई है हरियाली पर ।। स्वाति की उन बून्दों पर पपिहा का जीवन होता है वह याद उसी को करता है और स्वप्न में उसके सोता है।। ये त्याग न्योछावर की बातें मैं ... »

माँ

मन मन्दिर में जिसकी मूरत उसको दुनिया कहती माँ है माँ ममता की सच्ची मूरत जग में दुख को सहती माँ है ।। पुत्र नही तो दुख का मंजर पुत्र प्राप्ति पर भी दुख ऊपर सुख दुःख के संघर्ष है फिर भी प्यार से आंचल फेरे माँ है ।। पुत्र दुखी होता है जब भी माँ दुख का संज्ञान करे मेरा पुत्र है रुठा सायद बात का माँ सन्धान करे ।। वो तो ममता की है मूरत सारा दुख हर लेती है कमी हमे हो जो जीवन में हमको लाकर देती है ।। जन्म... »