हिन्द के चूल्हे की रोटी खा रहे फिर भी, बांध पाक के घुंघरू ये गा रहे फिर भी, इन्हें मुजरा ही आता है भजन क्या जाने, तभी ज़ाकिर,अफ़जल के गुण गा रहे फिर भी।। मेरा […]

लहू के आसूँ रोना, बमुश्किल समझ आएगा किसी से दिल लगा लो बस तजुर्बा खुद ही मिल जाएगा / जर्रा-ए-ख़ामोशी में है क्या रक्खा यहाँ कोई छुप न पाएगा तलाश-ए-महफ़िल रखो जारी कातिल मिल ही […]