Author: Atul Jatav

  • हाइकु

    डूबती नाव
    अंबर सागर में
    दूज का चाँद।

    पिघल-रहा
    लावा दिल अंदर
    आँखें क्रेटर ।

    सिसकी हवा
    उड़ चल रे पंछी
    नीड़ पराया ।

    यादों के मोती
    चली पिरोती सुई
    हार किसे दूँ।

    आसमान ने
    डाले तारों के हार
    घरों के गले।

    चौथ का चाँद
    सौत की हंसुली-सा
    खुभा दिल में।

    गया निगल
    एक पे एक गोटी
    कैरम बोर्ड।

    – Atul

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