वो खिड़की के जानिब अगर देखते है हर एक बार मुझको मगर देखते है जो कूचे से निकला हूँ कल परसो मै वो दीदार को हर पहर देखते हैं गरीबी में क्या है सिवा आरज़ू […]

जो उस के, महल में जाते हैं उसे देख के, फिसल जाते हैं हवा का रुख, जो बदलता है सियासतदाँ, बदल जाते हैं जो ठोकर, खाते रहते हैं वही आख़िर, संभल जाते हैं दिल को […]

उस के साथ चलने, का मसअला नहीं ये बात और है के, अब हौसला नहीं कुछ बात तो होगी, के उसने दगा दिया उससे मुझे कोई, शिकवा गिला नहीं सदियों गुज़र गए, कोशिशों के बावजूद […]

जिसको देख, डर गया कोई उससे इश्क, कर गया कोई वो ग़मज़दा, हो के बैठे थे उसका ग़म भी, हर गया कोई लोग जिससे, किनारा करते थे आज उसपे, मर गया कोई शुक्र कीजे के, […]

मुस्कुरा के दिखाने, से क्या फ़ायदा दर्द ए दिल को छुपाने, से क्या फ़ायदा उसने नज़रों से, नज़रों पे जो वार की अब यूं नज़रे चुराने, से क्या फ़ायदा तुमने ठुकरा दिया था, मुझे एक […]

उसका आमद, इस पार है क्या, क्या मेरा, इन्तेजार है क्या? हर पल वो, रंग बदलता है, गिरगिट का, रिश्तेदार है क्या दिल ने दिल से, हामी भर दी, क्या अब उसका, इनकार है क्या? […]