Author: Azhar Sabri

  • वो खिड़की के जानिब अगर देखते है

    वो खिड़की के जानिब अगर देखते है
    हर एक बार मुझको मगर देखते है

    जो कूचे से निकला हूँ कल परसो मै
    वो दीदार को हर पहर देखते हैं

    गरीबी में क्या है सिवा आरज़ू के
    वो समझेंगे कैसे जो घर देखते है

    निगाहें हैं उस पर, यक़ीं एक दिन के
    मिलेगा तो कुछ उसका दर देखते है

    इधर वो कभी या उधर देखते है
    ज़माने में हरसू कहर देखते हैं

    कभी उसके जानिब वो दीदार करते
    कभी मुझको भी इक नज़र देखते हैं

    तू कब तक रहेगा सितारों के बिच
    तेरे आने की हम डगर देखते हैं

    क़त्ल करने का उनका इरादा है क्या
    न जाने वो क्यों इस क़दर देखते है

  • दिल को मुट्ठी, में मत रखना

    जो उस के, महल में जाते हैं
    उसे देख के, फिसल जाते हैं

    हवा का रुख, जो बदलता है
    सियासतदाँ, बदल जाते हैं

    जो ठोकर, खाते रहते हैं
    वही आख़िर, संभल जाते हैं

    दिल को मुट्ठी, में मत रखना
    ये हाथों से, निकल जाते हैं

    माँ की दुआ है, साथ अगर
    तो हादसे भी, टल जाते हैं

  • जिस तरह मुझ पे तोहमत लगा रही है वो

    जिस तरह मुझ पे तोहमत लगा रही है वो
    शायद मेरे किरदार से वाक़िफ़ नहीं है वो

    झूठों के इस बाज़ार में मुंसिफ भी बैठ कर
    मुझ से कहा के मैं ग़लत, और सही है वो

    मैं ने बग़ावत कर दी है चाँद के लिए
    उस को जाके बता दो जहाँ कहीं है वो

    जल्वा गर है चाँद का तो मैं भी कम नहीं
    कल या परसों सुना था के ये कह रही है वो

    जिस ने सर-ए-बाज़ार मुझे ख़म कर दिया
    जो ताज पहने बैठा है, हाँ यही है वो

  • उस के साथ चलने, का मसअला नहीं

    उस के साथ चलने, का मसअला नहीं
    ये बात और है के, अब हौसला नहीं

    कुछ बात तो होगी, के उसने दगा दिया
    उससे मुझे कोई, शिकवा गिला नहीं

    सदियों गुज़र गए, कोशिशों के बावजूद
    दामन में लगा दाग, अबतक धुला नहीं

    ख़ाक छानता रहा, दिन रात मै मगर
    आस्तीं का साँप, अब तलक मिला नहीं

    मुंह फेर लिया उसने, इस क़दर अज़हर
    फूल जो मुरझा गए, अबतक खिला नहीं

  • जिसको देख, डर गया कोई

    जिसको देख, डर गया कोई
    उससे इश्क, कर गया कोई

    वो ग़मज़दा, हो के बैठे थे
    उसका ग़म भी, हर गया कोई

    लोग जिससे, किनारा करते थे
    आज उसपे, मर गया कोई

    शुक्र कीजे के, हिज्र के बाद
    लौटकर के, घर गया कोई

    आज मै में, डूब करके भी
    अपने पैरो, पर गया कोई

  • मुस्कुरा के दिखाने, से क्या फ़ायदा

    मुस्कुरा के दिखाने, से क्या फ़ायदा
    दर्द ए दिल को छुपाने, से क्या फ़ायदा

    उसने नज़रों से, नज़रों पे जो वार की
    अब यूं नज़रे चुराने, से क्या फ़ायदा

    तुमने ठुकरा दिया था, मुझे एक दिन
    चाँद अब घर बुलाने, से क्या फायदा

    ज़ख्म देकर मुझे, तुमने घायल किया
    दिल से अब दिल मिलाने, से क्या फ़ायदा

    इश्क ने कम किया जो, जहर का असर
    अब ये पीने पिलाने, से क्या फ़ायदा

    वक़्त का था तकाज़ा, मै उसका हुआ
    दिल में अब तेरे आने, से क्या फ़ायदा

    दिन ब दिन वक़्त यूं ही, निकलता गया
    अब यूं नाख़ून चबाने से, क्या फ़ायदा

  • उसका आमद, इस पार है क्या

    उसका आमद, इस पार है क्या,
    क्या मेरा, इन्तेजार है क्या?

    हर पल वो, रंग बदलता है,
    गिरगिट का, रिश्तेदार है क्या

    दिल ने दिल से, हामी भर दी,
    क्या अब उसका, इनकार है क्या?

    वो हिज्र के दिन, तो बीत गए
    क्या अब भी वो, बीमार है क्या?

    हर बार चमन, में कांटे मिले,
    इस बार ये, पहली बार है क्या?

    वो कलम से, वार करता है,
    क्या सच में, पत्रकार है क्या?

    सच बोलो तो, कांटे मिलते है,
    ये बुझदिल की, सरकार है क्या?

    तेरा उससे, इनकार है क्यों,
    क्या वो इतना, बेकार है क्या?

    हर मोड़ पे, झूठे मिलते है,
    ये झूठों का, बाज़ार है क्या?

    वो आजकल, क्यों है ख़ामोश,
    क्या कोई अंदर, वार है क्या?

  • Kal raat chandani thi, mousam mein nami thi

    Kal raat chandani thi, mousam mein nami thi
    halki si woh barsaat or barf jami thi
    Per raas na aya, aster woh nazara
    Mai tha, meri tanhaayi, bas teri kami thi

  • Ek koh e gham liye betha hoon

    Ek koh e gham liye betha hoon
    Log kahte hain piye betha hoon
    Koo e Jana me hui he jab se shikast
    Tab se hothon ko siye betha hoon

  • Ghar me taare hazaar laaya hoon

    Ghar me taare hazaar laaya hoon
    Chaand chhat pe utaar laaya hoon
    Bohot roka samandar ne mujhe
    Phir bhi kashti ko paar laaya hoon

  • Yeh zamana mujhe jeene nahi deta

    Yeh zamana mujhe jeene nahi deta
    Or yeh mekhana mujhe marne nahi deta

  • ley ke koi khabar nhi aata

    ley ke koi khabar nhi aata
    Ab to qaasid idhar nhi aata
    Lot aany ka waadah karte hyn,
    Par koi lot kr nhi aata
    Kab se palkein bichay betha hoon,
    Chand kyonkar nazar nahi aata
    Apni hasti mita deta azhar,
    Tuu agar Waqt per nahi aata

  • Mere naseeb me baqi zara gumaan bhi nahin.

    Mere naseeb me baqi zara gumaan bhi nahin.

    Agar zameen nahi to mera aasmaan bhi nahin.

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