Author: Baba JI

  • Us din

    उस दिन ,
    जब तुम कार से उतरी थीं |
    स्वर्ग से आयीं अप्सरा,
    सी लग रहीं थीं |
    काव्या दी, दीया
    तुम्हारा हाथ पकड़ तुमसे मिल रही थीं |
    मैं भी था सहमा-सहमा सा,
    अपनी अनिश्चित बारी के,
    इंतज़ार में |
    ‘आपका नाम’ तुमने पूछा था |
    मुद्दतों बाद मुझसे ,
    मेरा नाम किसी ने पूछा था |
    “मुदित”
    चौंक गयीं थीं तुम ये नाम सुनकर |
    याद आयी होगीं तुम्हें,
    शायद वो गरमी की छुट्टियाँ |
    तुमने दोहरायी होगीं,
    मन में वो बातें |
    तुमने वर्षों बाद दोहराया होगा मेरा नाम |
    उस दिन तुम मुझे,
    उतनी ही प्यारी लगी थीं
    जितनी पपीहे को बारिश |
    उस दिन से
    तुम्हारी तस्वीर छप गई थी,
    दिल में मेरे |
    बिल्कुल स्पष्ट तो नहीं,
    पर हाँ धुँधली अवश्य बन गई थी |
    उस दिन मुझे,
    तुममें दुनिया दिखाई दी थी |

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