Author: Bala Sunita

  • सूनापन

    आकर अंधेरों में डराता है सूनापन मुझे सहारा चाहिए चिल्लाता है सूनापन एक ऐसा सहारा जो हर कदम पर साथ रहे मैं जब भी डगमगाऊ संभालने मैं उसका हाथ रहे। जो नदियों के भीतर का सौंदर्य मुझे दिखाएं जो आसमां के पार तलक मुझे ले जाए पहाड़ों के ऊपर नदियों के भीतर दूर बहुत दूर ले जाता है सूनापन । जो शब्द हीन होकर भी बोलने में समर्थ हो जो दिल की बात मन से तोलने में समर्थ हो जो बता जाएगी जिंदगी क्यों जी रही हूं मैं गम और दुख आखिर क्यों पी रही हूं मैं ऐसे सवाल कर दिल के द्वार खटखटाता है सूनापन मुझे सहारा चाहिए चिल्लाता है सूनापन

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