कवि देवेन्द्र प्रताप सिंह "आग", Author at Saavan's Posts

फ़िर बतलाओ जश्न मनाऊँ मैं कैसी आजादी का

आतंकी की महिमा मंडित मंदिर और शिवाले खंडित पशु प्रेमी की होड़ है फ़िर भी बोटी चाट रहे हैं पंडित भ्रष्टों को मिलती है गोदी देशभक्त होते हैं दंडित सत्ता का हर इक दलाल बन बैठा ससुर जिहादी का फ़िर बतलाओ जश्न मनाऊँ मैं कैसी आजादी का   ईद खून का खेल हो गयी हत्या रेलमपेल हो गयी होली और दिवाली पर हावी बढ़ती विषबेल हो गयी दोषी घूम रहे हैं बाहर निर्दोषों को जेल हो गयी जुल्म ढह रहा है सब पर ही खास वर्ग आब... »