Dhruv kumar, Author at Saavan's Posts

हीरा

सिक्के इकट्ठा करके कोई धनवान नहीं होता। एक हीरा हीं काफी है जहाने अमीरी के लिए।। »

शायरी

ऐ वक्त जरा रुक जा क्या लाँँकडाउन है सिर्फ हमारे लिए? »

दीदार -ए-माहताब

नजरें चाह रही दीदार-ए-माहताब का नाचीज़ को क्या पता अमावस भी होती है। »

भगवान भी सो रहा

विलख रही धरती आसमान भी रो रहा। देख के अनाचार को भगवान भी सो रहा।। »

मानवता की पहचान

कहाँ खो गई तेरी इन्सानियत ओ इन्सान कहलाने वाले। गन्दी हो गई क्योंकर नीयत ओ इन्सान कहलाने वाले।। हर सुख सुविधा भोजन पानी सुलभ तुम्हारे घर में है। फिर काहे का झगड़ा भैया बोले आज डगर में है। जानवरों की भी एक मर्यादा होती तुम तो आखिर इन्सान हो। “ध्रुवकुमार’ कुछ ऐसा करो जो मानवता की पहचान हो। »

कैरोना

ये वाईरस कैरोना का बना महामारी भयंकर है। दिखे उपाय बचने का स्वच्छ और शुद्ध जो नर है।। रखो सब पे सहानुभूति पर रहना सबसे बचकर है। धोकर हाथ रहना सब मिलाना हाथ ना कोई। खुद को दूर रख इतना छींकता खाँसता हो कोई।। मिले ना संग औरोँ का तुम्हारी सांस सांसों से। कैरोना दूर भागेगा सकल संसार रासों से।। यही संकल्प है बन्धु। यही विकल्प है बन्धु।। »

शोभा

शोभे सरोवर राजहंस से बगिया शोभे कोयलिया से। ज्ञानी जन से सभा की शोभा दुनिया शोभे मधुर बोलिया से।। »

दिल का भाव

कोई छंद नहीं पदबन्ध नहीं। तुकबंदी का है प्रबंध नहीं दिल के भाव को लिखता हूँ चाहे कवियों को हो पसन्द नहीं।। »

चोट अपनों का

चोट अपनों के फूलों ने जो दिल को दिया, गैर के पत्थरों में वो दम था कहाँ। »

मगन में

चांद बनकर चमकती रहो नित गगन में। देखकर हीं मेरा मन रहेगा मगन में।। »

तुर -ए-नजर

तीर नजरों से तूने जो घायल किया अब खंजर उठाने से क्या फयदा। »

होरी

धूम मची है आज व्रज मेँ बरसाने मेंं थोड़ी। आजा मेरे मोहन प्यारे खेलन हमसे होरी ।। »

होली

आया रंग बिरंगी होली का त्योहार मेरे यारा। आज खुशियों के रंग रंगदार मेरे यारा।। »

होली

आया रंग बिरंगी होली का त्योहार मेरे यारा। आज खुशियों के रंग रंगदार मेरे यारा।। »