Divyanshu Pal Nagar, Author at Saavan's Posts

तुम्हे मालूम हो ..

तुम्हे मालूम हो … कुछ बाकी सा रह गया है तुम्हारे – मेरे दरम्यान… जिसे मैं बहुत कोशिश करने पर भी शब्द नहीं दे पाता, बस यूँही कभी महसूस कर लिया करता हूँ अकेले में, गोयाकि, कुछ फुसफुसाहटें, कुछ पहली बारिशें, कुछ अधपके से तुम्हरे साथ देखे ख्वाब, कुछ तुम्हारी सी छुअन, कुछ चुम्बन, कुछ अकेली-अकेली सी ढीठ शामें, कुछ आँखों-आँखों में काटी लम्बी रातें, कुछ करीने से सहेजे हुए तुम्हारे लैटर, ... »

है, तो है |

यूँ तो है बेताब और भी कई, आशिक कई, तन्हा कई, पर दिल आज भी सिर्फ उसी के लिए बेकरार है, तो है | बहुत लिखा गया, बहुत पढ़ा गया, कुछ किया भी गया, प्यार, मुहब्बत, इश्क, जवानी सब लफ्फाज़ी है, तो है | वो 8 सालों से गाँव में अकेली रहती है, कभी न कोई ख़त न कोई तार, पर बूढी आँखों में बेटे से मिलने की आस, आज भी है, तो है | उसके सपने बांधे गए चांदी की जंजीरों से, सिसकियाँ दबा दी शहनाई की आवाज़ से, अब बाप के कंधो प... »