तू मुझे चाह ले संवर जाऊं।। या कहे टूट कर बिखर जाऊं।। रास्ता कौन मेरा तकता है लौटकर किसलिए मैं घर जाऊं।। तू सफ़र में हो तो ये मुमकिन है मैं संग-ए-मील सा गुज़र जाऊं।। […]

तू मुझे चाह ले संवर जाऊं।। या कहे टूट कर बिखर जाऊं।। रास्ता कौन मेरा तकता है लौटकर किसलिए मैं घर जाऊं।। तू सफ़र में हो तो ये मुमकिन है मैं संग-ए-मील सा गुज़र जाऊं।। […]

मेरी पुरनम कहानियां सुनकर।। दिल की डूबें न कश्तियां सुनकर।। तेरे चर्चे में फूलों की ख़ूशबू पास आती हैं तितलियां सुनकर।। दूल्हा बाज़ार से ख़रीदेंगे क्या कहेंगी ये बेटियां सुनकर।। वह मुझे याद कर रही […]

सौ बार सरे-राह सफ़र छोड़ना पड़ा।। मंज़िल पे हर परिन्द को पर छोड़ना पड़ा।। पुश्तैनी घर की जब मेरे दहलीज़ गिर पड़ी घर को बचाने के लिए घर छोड़ना पड़ा।। दहशत के लिए हो रहे […]