वो ज़माना गया जब एक नारी अपने हक़ के लिए लड़ा करती थी। वो ज़माना गया जब एक नारी अपनी जगह बनाने के लिए मरा करती थी। आज की नारी इतनी सक्षम है कि गलत […]

  मैं तितलियों की तरह उड़ना चाहती थी मैं फूलों की तरह मुस्काना चाहती थी मैं इंद्रधनुष के रंगों सा बिखरना चाहती थी पर……… ज़िम्मेदारियों की ज़जीरों ने मुझे कैद कर लिया घर गृहस्ती की […]