थर-थर कॉंप उठी थी धरती, रूह थम गई थी अंग्रेजों की। ऐसी थी वो रानी लक्ष्मी, अपनी झाॅंसी के वीरों की। जन्मी जब प्रकृति ने भी शीश झुकाया था, माथे पर तेज देख उसके हर […]