प्रेम की भाषा, ना स्वरूप ना रूप बस एक भाव! जो कभी हमने जाना, पर कभी जाना ‘ही’ नहीं। प्रेम की माया, प्रेम की काया,तुमने भी सीखी और हमने भी पढ़ी, पर पढ़ कर भी […]