पहेली क्या है?
शब्दों की जब होड़ मचे,
चित्र विचित्र सा रूप रचे,
अनजाने सा प्रतीत करे,
उत्तर की खूब कहे,
पर उत्तर को ना प्रकट करे,
घूमे ये देश विदेश सारा,
पर जवाब होता है जैसे,
सुई या प्याज या फिर आरा,
कभी अटक के कभी भटक के,
हर गुत्थी को सुलझा के,
जवाब आता है इसका,
दिमाग की बत्ती को सुलगा के,
इसकी भी अपनी बड़ी जोर कहानी है,
कई विद्वानों ने उत्तर ढूंढने की ठानी है,
बीरबल और तेनालीराम को भी हुई बड़ी परेशानी है,
हर युग सभी पंडितो ने इसकी मानी है|
Author: Gaurav Shrivastav
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पहेली