हिंदी ग़ज़ल २४/०५/२०२० रचनाओं के सुर-सागर में उतर गया हूं। सृजनशीलता मैं भी देखो कर गया हूं। कल्पनाओं की कोपलताएं फूट पड़ी हैं। शब्दों की बगिया में पलछिन ठहर गया हूं। डोर प्रीत की थाम […]