Harish Joshi U.K's Posts

लतड़ पतड़ स्यां स्यां (गढवाली हास्य)

लतड़ पतड़ स्यां स्यां बल लतड़ पतड़ स्यां स्यां हाई रे मेरी फ्वां फ्वां नोना बेरोजगार छन अभी नि आई कालो धन लतड़ पतड़ स्यां स्यां बल लतड़ पतड़ स्यां स्यां मंत्री जी की गाडी बल दिनी छाई फुल होरन सड़की मा बल क्वी नि घूमा साइड दी दिया तुम फ़ौरन लतड़ पतड़ स्यां स्यां बल लतड़ पतड़ स्यां स्यां हाई रे मेरी फ्वां फ्वां कुर्सी मा बिराजमान उत्तराखंड का बड़ा पधान दारू की फ़ैक्टरी लागली जनता को बल कुञ्ज घाण लतड़ पतड़ स्यां स्यां... »

सरहद का रखवाला

हम सरहदों पर रहते हैं आज ज़माने से ये कहते हैं भारत माता के वीर सभी हम हमको सभी सरहद का रखवाला कहते हैं। है अगर हिम्मत किसी दुश्मन में तो आकर टक्कर ले हमसे हम भारत को अपने दिल में रखते हैं जज्बा-ए-हिन्दोस्तान लोग इसको कहते हैं। कोई नापाक कदम न आने देंगे इस धरा पर हम आज सर पे कफ़न बाँध कर ये कहते हैं दुश्मन कितना ही शातिर क्यों न हो उसको धुल चाटने की हिम्मत हम रखते है। हम सरहदों पर रहते हैं आज ज़माने ... »

धर्मु झांझी (गढवाली हास्य)

कोराना से बल सबुकी हालत पस्त हुयीं च देश की अर्थब्यवस्था की भी हालत खस्त हुईं च रोजी रोटी कु जुगाड़ ह्वो न हो पर, दरोल्यों की एसूं दों बल फ्वां फ्वां हुयीं च सरकिर की भल मनसा ह्वो न ह्वो पर एक बात त 100% च कि धर्मुं झांझी बल देश की अर्थब्यवस्था की नींव बण्यूं च।। »

सपने

कौन कहता है कि अपने उज्जल भविष्य हेतु सपने देखना या कल्पना करना गलत है? सपने देखो और जरूर देखो, अपपे उज्जवल भविष्य की कल्पना करो और ऐसी कल्पना करो जो दूसरों को तो क्या बल्कि आपको खुद को असम्भव प्रतीत होती हो।। और कठिन प्रयास से उस असम्भव को सम्भव करके दिखा देना।। लेकिन आपने क्या सपना देखा है या क्या कल्पना की है यह तब तक किसी को न बताना जब तक आपका सपना हकीकत मे न बदल जाए।। क्योंकि यहां लोग आपके सप... »

शायरी (गढवाली हास्य)

हमें तो गंज्यालों से कूटा गया सुल्याठों में कहां दम था।। मेरा खुट्टा तो रड़ा वहाॅ जहाॅ कच्यार कम था।। 😃😃😃😃😃😃😃😃 »

रण शंख का अब नाद हो

प्रज्वलित ज्वाला हुई है रण शंख का अब नाद हो शत्रु जो पुलकित हुआ है उसका करो अब नाश तुम। न रोको अभी तुम भावना को रक्त का उबाल थमने से पहले दुश्मन को पंहुचा दो काल के उस गार में प्रज्वलित ज्वाला हुई है रण शंख का अब नाद हो। वो हमारी भावना को विवशता कहते रहे उनके दिए हर जख्म को, हमने सदा हंसकर सहे पर वक़्त है बदलाव का, और आंधी भी अब आयी है देश के दुश्मन की चालें, इस मूड पर हमको ले है। तुम दिखा दो रास्त... »

प्रेम का पहला खत

नाराज न होना खत को पढ़कर, न जानू मैं खत को लिखना। बस आपके खातिर लिख डाला, यूॅ न हँस देना खत को पढ़कर। कुछ शब्द चुनिंदा लिये हुए, कुछ खुशबु फूलो की लेकर यह कलम तुम्हारी तारीफों के गुण लिखती है हल्के-हल्के। मैं सावन वाला गीत लिखूॅ या बरसात का कोई राग लिखूॅ इस कलम प्रज्जवलित ताकत से मैं प्रेम प्रदर्शी राग लिखूं। नाराज न होना खत को पढ़कर, न जानू मैं खत को लिखना। बस आपके खातिर लिख डाला, यूॅ न हँस देना खत ... »