हैरानी कुछ यूँ हुई कि उन्होंने हमें सर खुजाने का वक़्त भी नही दिया, जबकि वक़्त उनकी मुट्ठियों में भी नही देखा गया, लब पर जलती हुई सारी बात हमने फूँक दी सिवाय इस सिद्धांत […]

चलाओ टीवी, भिन्डी काटती हुई अंगुली का पसीना न पोंछते हुए प्रेमिका को मिलाओ फोन, बांटों दुःख ओम पुरी चले गए, सुनाओ निःशब्द रो लो तीन सौ आँसू लिखो डायरी में, बदलो तस्वीरें और बताओ […]