Hari Paudel, Author at Saavan's Posts

प्रभु अब तो बुला ले

प्रभु अब तो बुला ले प्रभु अब तो अपने पास बुला ले छल -कपट की इस दुनियाँ में क्या बचा अब काम हमारा जहां जहान के सारे रिश्ते अपनी – अपनी कीमतें लिये रिश्तों के बाज़ार में बिकते … तेरे सिवाय अब कौन संभाले प्रभु अब तो अपने पास बुला ले…….. दुखों ने मुझको तोड़ दिया है घरवालों ने छोड़ दिया है इन लड़खड़ाते कदमों में तेरे नाम की छड़ी का सहारा है तुझसे उम्मीदों को पाले प्रभु अब तो अपने पास ... »

हिन्दुस्तान की ब्यथा

भारत! अब न भारद्वाज कि भारत रही न अकबर की हिन्दुस्तान एक कलियुग का सुदामा हाथों मे दिया लिए हुए हिन्दुस्तान ढूढ़ रहा था कचरे कि ढेर मे उसकी उंगलीयाँ थिरक रही थि और भारत! बिलखतेहुए बच्चो को फुटपाथ पर छोडकर सर पे कम्प्युटर के बोझ लिए हुवे भाग रही थि चाँद कि तरफ किसे फिकर है भारत की इस सुदामा को? और यह दीन दुखि: सुदामा! हसरत भरि नजरो से दानीयों को ढूढ़ रहा था यह दिन कि लाली इस दीन का कर्मक्षेत्र था उ... »

फुटपाथ

सिकुड़कर फटि हुई कपड़ो मे गठरीनुमा होता जारहा है वह मायुस सा आँखो मे प्रचुर गम्भीरता लिए हुवे जैसे मजबूर मुक पशु हो पडा है फुटपाथ मे इसे देख अपने बदन के सुटको उतार फेकनेको जी चाहता है खामोस आँखो से वह बहुत कुछ कहरहा है, इस जमाने को टुकुर टुकुर हसरत भरी नजरो से देखता है कोइ राहगीर चबाये जो सेव को गटर मे फेके जुठा पत्तल जो चाटा उसने डैनिग टेबुल मे सजे पकवानोको देख उल्टी करनेको जी चाहता है क्यों एक इ... »