प्रभु अब तो बुला ले प्रभु अब तो अपने पास बुला ले छल -कपट की इस दुनियाँ में क्या बचा अब काम हमारा जहां जहान के सारे रिश्ते अपनी – अपनी कीमतें लिये रिश्तों के […]

भारत! अब न भारद्वाज कि भारत रही न अकबर की हिन्दुस्तान एक कलियुग का सुदामा हाथों मे दिया लिए हुए हिन्दुस्तान ढूढ़ रहा था कचरे कि ढेर मे उसकी उंगलीयाँ थिरक रही थि और भारत! […]

सिकुड़कर फटि हुई कपड़ो मे गठरीनुमा होता जारहा है वह मायुस सा आँखो मे प्रचुर गम्भीरता लिए हुवे जैसे मजबूर मुक पशु हो पडा है फुटपाथ मे इसे देख अपने बदन के सुटको उतार फेकनेको […]