तूफ़ान तो नहीं हूँ लेकिन पवन हूँ चंचल तेरे आसपास चलकर शीतल करूंगा पल-पल। संगीतमय करूंगा कविता से तेरा आँचल उन्मुक्त खुशियाँ दूंगा तोडूंगा गम के सांकल।

ज़रा सी बात पर चिढ़ना दूसरों को बुरा कहना ये आदत छोड़ दो ना जी उल्टी बात शुरुआत तुमने ही करी थी ना, मिला उत्तर तो चिढ बैठे ये आदत छोड़ दो ना जी

बात ठंडी हो चुकी थी फिर लगाने आग आये सोचते हैं जो कहें हम सब करें स्वीकार उसको। दूसरों पर फेंक कीचड़ मत बनो यूँ पाक-साफ़ खुद की गलती देख लो पहले करो स्वीकार उसको।

पतन हाँ पतन पतन की शुरुआत कब होती है , जब घमंड की पराकाष्ठा होती है, जब अपने से काबिल कोई नहीं दिखता है आँख में पट्टी बंधी होती है। जब व्यक्ति दूसरे की गुणवत्ता […]