Indu Pandey's Posts

पवन हूँ चंचल

तूफ़ान तो नहीं हूँ लेकिन पवन हूँ चंचल तेरे आसपास चलकर शीतल करूंगा पल-पल। संगीतमय करूंगा कविता से तेरा आँचल उन्मुक्त खुशियाँ दूंगा तोडूंगा गम के सांकल। »

नारी के सम्मान में

मैं नारी हूँ , मैंने ऐसे महापुरुष देखे हैं नारी के सम्मान में खुद को युधिष्ठिर और दूसरों को दुःसाशन दिखाते देखें हैं। »

ज़रा सी बात पर चिढ़ना

ज़रा सी बात पर चिढ़ना दूसरों को बुरा कहना ये आदत छोड़ दो ना जी उल्टी बात शुरुआत तुमने ही करी थी ना, मिला उत्तर तो चिढ बैठे ये आदत छोड़ दो ना जी »

फिर लगाने आग आये

बात ठंडी हो चुकी थी फिर लगाने आग आये सोचते हैं जो कहें हम सब करें स्वीकार उसको। दूसरों पर फेंक कीचड़ मत बनो यूँ पाक-साफ़ खुद की गलती देख लो पहले करो स्वीकार उसको। »

पतन

पतन हाँ पतन पतन की शुरुआत कब होती है , जब घमंड की पराकाष्ठा होती है, जब अपने से काबिल कोई नहीं दिखता है आँख में पट्टी बंधी होती है। जब व्यक्ति दूसरे की गुणवत्ता पर परोक्ष रूप से हमला करता है या करवाता है, पतन की शुरुआत तब होती है। जब व्यक्ति योग्यता से आगे बढ़ने की बजाय दूसरों पर तंज कसता है या कसवाता है, दूसरे की लोकप्रियता पर परेशान हो उठता है, पतन की शुरुआत तब होती है। »

शुभरात्रि

प्यारी सी शुभरात्रि है सभी को कविता यूँ ही खिलती रहे सावन में बरसती रहे »

मुक्तक

सावन मास शिव का मास शिव ही शिव चारों ओर बरसात की बूंदें शिव को करा रही स्नान , देवाधिदेव महादेव का आओ सब करें ध्यान, »