Satyam Barnaval, Author at Saavan's Posts

क्या तुम अब भी वैसे ही जीते हो?

(जब किसी परिवार का एक बेटा शहीद हो जाता है और चंद सालों बाद सारी दुनिया उसके परिवार के दुखों को भुला देती है, उस समय उसके घर के दरवाजे से गुजरती पुरानी हवाये जो उस घर को हमेशा खेलते,मुश्कुरते देखती थी,अब उस परिवार को विकट परिस्थिति में देखकर उस परिवार के हर सदस्य से कैसे-कैसे सवाल करती है):- . काफ़ी दिनों बाद लौटा फिर उस गली से, जहाँ खुशियों का एक परिवार रहता था। अब यहां तो शान्ति का कहर बरस रहा है... »

मैं हर बात पर रूठ जाता हूं

जरा सी बात में टूट जाता हूं , गुस्से से आकर फुट जाता हूँ। लोग समझते है आदत है मेरी मैं हर बात पर रुठ जाता हूँ। हृदय पर हल्की घाट होती है, बिना बात की बात होती है। बढ़ जाता है द्वेष का किस्सा, फिर मन मे खुराफात होती है।। गलतफहमी धीरे से बढ़ जाती है। गुरुर दिमाग में गढ़ जाती है। मन मे बनती है ख्याली पुलाव, कुछ और ब्यथा बढ़ जाती है।। बुराई का मैं सरताज नही हूँ। बुझदिलों का आवाज नही हूँ। प्रलयकारी होता है... »