मैने माना, ओ रे कान्हा, दुनिया पल का आना- जाना, पर है ठाना, दूँगी ताना, अब फिर जो तूने न माना, तूने राधा के संग बाँधा, हो आधा पर प्रेम को साधा, बोल, ये जो […]

शर्म आ रही है ना उस समाज को जिसने उसके जन्म पर खुल के जश्न नहीं मनाया शर्म आ रही है ना उस पिता को उसके होने पर जिसने एक दिया कम जलाया शर्म आ […]