Jaydeep Bhaliya, Author at Saavan's Posts

“कामयाबी की ईमारत”

आज भी वो दिन याद आते है उसे भुलाऊ कैसे ये कामयाबी की ईमारत छोड जाऊ कैसे… बचपन में कलम थमाई थी आपने, आज वो कलम झुमती है एसे ये कामयाबी की ईमारत छोड जाऊ कैसे… गली में देख आपको, डरता था मैं भी, ये मीठा डर लाऊ कैसे ये कामयाबी की ईमारत छोड जाऊ कैसे… दुनिया के सामने जीना सिखाया, ये तरिका अब आझमाऊ एसे ये कामयाबी की ईमारत छोड जाऊ कैसे… पाठशाला से लेकर आज तक की दूरी, समजा ना पाऊ ये ... »