देखो उस बुढ़िया को,घर के कोने मे जो रहती है आँगन मे डली चार पाई, पर रोज़ वो बैठी रहती है शरीर मुरझाया सा ,ना आँखों मे कोई किरण ख़ुशियों का तो ना अता पता […]