अकेली नही हूँ,पर तन्हा तो हूँ, यहाँ हूँ तो सही,पर पता नही कहाँ हूँ। कैसे कहु और किससे कहु , मेरे मन की व्यथा ये। सब कुछ होते हुए भी, क्यों तन्हा हूँ मैं। भीड़ […]

वो कहता था ,की सोनिये तेरी आंखां तो काजल जच्चदा सी, फेर मैंने वी पूछ लिया मुझे क्यों रुला कर तू चला गया। मैंने पूछा क्यों चूम जाते हो होंठो को यूँ तुम, वो मरजाना […]

हुए बहुत लोग शहीद मेरे देश को बचाने को, पर उन “शहीदों” की “शहीदी” आज खुद शहीद सी लगती है। देश में हो रहे हंगामो में खुद कही गुम सी लगती हैं। जिस दिन औरत-आदमी […]

मैं आज भी गमो का क़र्ज़ चुकाते हुए, अपनी सारी खुशियां दाँव पर लगाये बैठी हूँ। कौन कहता है सिर्फ बेवफा होती है औरत, मैं अपनी वफ़ा साबित करने में अपना दामन ,सबकी बातों से […]