Author: Prangya Panda

  • मेरी पहली कविता

    मेरी पहली कविता की ना जाने क्यों याद आ गयी,
    आँखों में ना जाने खुशियों की आँसू क्यों आ गयी।
    लिखने का वैसे हमें कोई शौक नहीं था,
    पर हाथों ने कलम को अपना लिया था।
    किसी के यादों में बस यूँही कुछ लिख लिया,
    दोस्तों के तारीफ ने अंदर के लेखक को जगा दिया।
    आज जिस मुकाम पर खड़े हैं उसका पूरा श्रय दोस्तों को ही देते हैं,
    उनके बिना मेरे दर्द पन्नों पर और मैं खुदसे कभी मिल नहीं पाते।
    आज लिख रही हूँ मैं अपनी पहली कविता के बारे में,
    एक समय था जब मेरे दोस्त मेरे थे।
    उन्हीं के लिए तो लिखा था मैंने कविता प्यार से,
    तारीफ करके उन्हों मिलवा दिया मुझे अपने अंदर के लेखक से।
    ✍️प्रज्ञा पंडा
    Instagram- @kahawat_zindagi

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