चढ़ती हुई धुंधलाहट, बादलों में छुपता सूरज, उतरता हुआ नशा शराब का और चढ़ता हुआ नशा तुम्हारा इन तारो को जब मैने चांद के सामने टिमटिमाते हुए शर्माता देखा, शर्म के मारे मैने आंखें बंद […]