बादलों से इक किसान पुछता रहा, महीना तो आया सावन, भीगी नहीं जमीं की लाज। बोलो भला कैसी रही यह गर्मी की मार, खेतों को बंजर देख उद्वर लगी आग। ऐठी माटि हाथ दिये पसार, […]