कविता इक खूब नहाती दिखी, कुछ मधुर, पंक्ति गाती दिखी , “छटा घन घोर ,मन बड़ा हर्षाया , यूं तो कविता में कागज में ही रही, लिखे जब तुमने प्रेम के दो बोल, आंखों से […]