क्या हुआ जो उम्र की एक शाम ढल गई, दिल में अभी उम्मीदों के सूरज हज़ार हैं। बगिया उजड़ गई जो आँधी तूफान से, नए बीज अंकुरण के लिए फिर तैयार है। नाकामियों के डर […]