Author: Khushpreet Kaur

  • गीत जिंदगी का

    क्या हुआ जो उम्र की एक शाम ढल गई,
    दिल में अभी उम्मीदों के सूरज हज़ार हैं।
    बगिया उजड़ गई जो आँधी तूफान से,
    नए बीज अंकुरण के लिए फिर तैयार है।
    नाकामियों के डर से न तू छोड़ देना आस,
    जो गिर कर संभलते हैं, वही शाह सवार हैं।
    ना दे जो कोई साथ राहों में तेरी,
    चल देना अकेला, यह वक़्त की पुकार है।
    मेहनत कर, ना देना दोष तू नसीब को,
    नसीब लिखने का हुनर भी तेरे पास है।

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