हसीनों की वादियों में बदसूरतों को भी रहने दीजिए, दर्द कितना है फ़िज़ाओं में ज़रा हमें भी सहने दीजिए ! जानते हैं वक़्त है आपका पर हमें भी थोड़ी पनाह दीजिए, मारना है तो फिर […]

“महिमा अनंत है महलों में दिये की बिस्तर पर तकिये की बारात मे दूल्हे की घर मे चूल्हे की महिमा अनंत है बागों मे माली की ससुराल में साली की महफ़िल में शराब की बाद […]