है कुछ करना भी मुझे कुछ नया सा कुछ अलग की मैं न बस रहूँ  एक धूमिल  खंडित नग——(१) तोड़के बंधन सभी, छोड़के सब व्याधियां लो चला मैं देख लो नव सृजन करने अभी——-(२) […]