Author: Lokesh

  • हाँ मैं कश्मीर हूँ

    क्या यही सरजमीं थी मेरे वास्ते
    ये कैसी कमी थी मेरे वास्ते
    खुद को देखू तो स्वर्ग का अहसास हैं
    मेरे दामन में आतंक का आभास हैं
    सहमे सहमे है बच्चे मेरे हर घरी
    जाने कब टूटेगी ये नफरत की लड़ी
    साडी दुनिया के नज़रो में मैं हीर हूँ
    बहुत बेबस और खामोश मैं कश्मीर हूँ
    नहि हिन्दू हूँ और न मैं मुस्लमान हूँ
    सिर्फ जंग और लाशो का साक्षिमान हूँ
    यूँ न बारूद से मुझ को जीतोगे तुम
    पैगाम अमन का देने को आतुर मैं हूँ
    कभी भारत तो कभी पाकिस्तान और चीन
    लूट लो सब मुझे मैं हूँ बहुत कमसिन
    मेरे आँगन से तिरंगे तक को छीन लिया
    मेरे जख्मो से इंसानियत तलक हैं गमगीन
    जिसका जितना भी हिस्सा है मुझ में जान लो
    चाहो तो मुझ से मेरी रूह तलक बाँट लो
    इतना ही बस मुझ पर कर दो एहसान
    मेरी सरजमीं को मत बनाओ शमसान
    अस्तित्व की लड़ाई लड़ने वाला मैं एक वीर हूँ
    बहुत बेबस और खामोश मैं कश्मीर हूँ
    हाँ मैं कश्मीर हूँ !!!!!!

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