Kavita Malpani, Author at Saavan's Posts

ज़िन्दगी

ज़िन्दगी तेरा शुक्रिया, प्यारी सी सुबहे दी तारों भरे आसमां का आंचल दिया खुशनुमा, हवाओं से सरोबार् जो किया…. सोने चांदी के चम्मच ना सही धूप की चुनौतियों भरे रास्तों पे.. चलने का साहस ,जो दिया… जीवन की सांसों पर, कर्ज है तेरा… ज़िन्दगी तूने मुझे , है सब कुछ दिया…… »

ज़िन्दगी

ज़िन्दगी तेरा शुक्रिया, प्यारी सी सुबहे दी तारों भरे आसमां का आंचल दिया खुशनुमा, हवाओं से सरोबार् जो किया…. सोने चांदी के चम्मच ना सही धूप की चुनौतियों भरे रास्तों पे.. चलने का साहस ,जो दिया… जीवन की सांसों पर, कर्ज है तेरा… ज़िन्दगी तूने मुझे , है सब कुछ दिया…… »

धूप

धूप,आज कुछ, सरक आयी, मेरे आंगन में…. और, बिखेर गई, मुठ्ठी भर अबीर…… …. कविता मालपानी »

ए मन जरा थम

ए मन, ज़रा थम. तू चला है… थाम के, अपनी पतवार… नदी तो, बहती रहती, जो सतत् , चाहे जैसे भी हों रास्ते… कंकरीले.. पथरीले… पतवार ना छूटे, हाथों से… तू कौन?? तेरा वजूद क्या?? सिर्फ़ एक आत्मा!! राह में, जो मुकाम आए… वो पड़ाव भर ; इस सफ़र के… तू घिरा,है। जिस भीड़ से.. उनके , कुछ ॠण हैं बाकी, भरदे, अपने प्रेम के प्यालों से.. पार करके, ये पड़ाव… फिर थामले, अपन... »