ज़िन्दगी तेरा शुक्रिया, प्यारी सी सुबहे दी तारों भरे आसमां का आंचल दिया खुशनुमा, हवाओं से सरोबार् जो किया…. सोने चांदी के चम्मच ना सही धूप की चुनौतियों भरे रास्तों पे.. चलने का साहस ,जो […]
ज़िन्दगी तेरा शुक्रिया, प्यारी सी सुबहे दी तारों भरे आसमां का आंचल दिया खुशनुमा, हवाओं से सरोबार् जो किया…. सोने चांदी के चम्मच ना सही धूप की चुनौतियों भरे रास्तों पे.. चलने का साहस ,जो […]
ज़िन्दगी तेरा शुक्रिया, प्यारी सी सुबहे दी तारों भरे आसमां का आंचल दिया खुशनुमा, हवाओं से सरोबार् जो किया…. सोने चांदी के चम्मच ना सही धूप की चुनौतियों भरे रास्तों पे.. चलने का साहस ,जो […]
धूप,आज कुछ, सरक आयी, मेरे आंगन में…. और, बिखेर गई, मुठ्ठी भर अबीर…… …. कविता मालपानी
ए मन, ज़रा थम. तू चला है… थाम के, अपनी पतवार… नदी तो, बहती रहती, जो सतत् , चाहे जैसे भी हों रास्ते… कंकरीले.. पथरीले… पतवार ना छूटे, हाथों से… तू कौन?? तेरा वजूद क्या?? […]
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