गंध भरे महूबे मन छू गए सकारे यादों की दोपहरी चढ़ आयी द्वारे गूँज उठी सुधियों नूतन नमराइयाँ कूँक रहे कण्ठ आज दर्द की रुबाइयाँ डूब गए गागर में सागर रतनारे गंध भरे महूबे मन […]