मनीष देव त्रिपाठी's Posts

संगत

आये टोली ले मक्खन खिलाने को आये कान्हा ले अपने संग संगत को देखि मोहे कान्हा को छोड़ चलन छिप गये परदे के पीछे आज पकड़ में आया कान्हा मक्खन गिराये कान्हा भूमि पर »

आज पकड़ में आयो कान्हा

आयो कान्हा देखि मोहे तोरे संगी साथी कुछ भाग चलत, कुछ ले परदे कि आड़ छुप खम्ब कि ओट देखत मोहे कि आज मेरो पकड़ में आयो कान्हा जब यह आया चुपके से माखन खाने को आज पकड़ में आयो कान्हा »