Author: मनप्रीत गाबा

  • ख़ुद का साथ चाहिए

    मैं ख़ुद को ख़ुद से बाहर निकालना चाहता हूं,
    मैं कुछ करके दिखाना चाहता हूं।
    कोई मेरा साथ दे ना दे,
    मैं ख़ुद का साथ ख़ुद पाना चाहता हूं।

    मेरा दिल बहुत डरता है,
    कभी कभी
    दिमाग भी उलझता है।
    कभी कभी
    दिल और दिमाग का टकराव भी हो जाता है।
    कभी कभी
    सहना हद से बाहर हो जाता है।
    मैं दोनों का मसला सुलझाना चाहता हूं।
    मैं ख़ुद को ख़ुद से बाहर निकालना चाहता हूं।

    मनप्रीत गाबा

  • स्वच्छता

    कुछ फर्ज मेरा है
    कुछ फर्ज तुम्हारा है
    देश को स्वच्छ रखना
    ये फर्ज हमारा है…..

    देश की स्वच्छता का
    नारा लगाओ
    जन सेवा मे
    हाथ बढाओ …..

    झाड़ू हमारा हथियार हो
    भारत भूमि से हमे प्यार हो
    अच्छी आदते तुम भी डालो
    कूड़ा कूड़ेदान में डालो ….

    पोलीथिन बैग न जलाओ
    सब्जियां जुट के थैले में लाओ
    प्लास्टिक बोतल दुबारा इस्तेमाल करो
    अपनी बुरी आदतों में सुधार करो ….

    मनप्रीत गाबा

  • लालच

    पक्षी उड़ान भरता है
    और
    इंसान चाल चलता है।

    पक्षी एक वक्त का खा के भी खुश है
    और
    इंसान 7 पीढ़ियों का जोड़कर भी खुश नही।

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