बड़ी चाह है ख़ुद को फ़िर बर्बाद करें, तुम आओ कि हम फिर मुलाक़ात करें !!
बड़ी चाह है ख़ुद को फ़िर बर्बाद करें, तुम आओ कि हम फिर मुलाक़ात करें !!
पकड़ी जब नफ़्ज़ मेरी., हकीम लुकमान यू बोला…! वो ज़िंदा है तुझ में..’ तू मर चूका है जिस में..!?✍?
उदासी जब तुम ?? ♀️पर बीतेगी ? तो तुम भी ?जान जाओगे, कोई ? नजर-अंदाज ? करता है तो ? कितना दर्द ? होता है..
कवि होना भी खुदा की रहमत का ही नमूना है वरना युं अपने दर्द को शब्दों में बयां कर पाना हर किसी के बस की बात नहीं।
पानी से भरी आखें लेकर मुझे घूरती ही रही शीशे के उस पार खड़ी लड़की उदास बहुत थी।
मकड़ी जैसे मत उलझो तुम गम के ताने बाने में, तितली जैसे रंग बिखेरो हँस कर इस ज़माने में..
मेरी आंखों में झाँक लो आकर जलते ख्वाब जो देखना चाहो।
तु आए और आकर लिपट जाए मुझसे उफ्फ ये मेरे महंगे ख्वाब
कितना खुश है वो मुझे भुलाकर ए खुदा मुझे भी उसके जैसा दिल दे दे….।
दौलत नहीं शोहरत नहीं न वाह वाह चाहिए कैसे हो कहां हो बस दो लफ्जों की परवाह चाहिए।।
यूं ही तुम ना आते सीने में ना चोरी मेरा दिल हो पाता ना कृष्ण मीठी रासलीला रचता ना इश्क का नाम यूं ही कोई जान पाता यूं ही ये दिल दीवाना ना होता काश […]
शाम हो गई तुम्हे खोजते माँ तुम कब आओगी जब आओगी घर तुम खाना तब ही तो मुझे खिलाओगी, रात भर न सो पाई करती रही तुम्हारा इंतजार सुबह होते ही बैठ द्वार निगाहें ढूंढ […]
कम्बख्त वो हमारे सामने बेवजह ही मुस्कुरा गऐ बेवजह ही हम उनकी बाहोँ में आ गऐ खबर न थी जमाने को इस नए चमन से रिश्ते की हम भी बेखबर जमाने से नैना लड़ाते चले […]
तलबगार है कई पर मतलब से मिलते हैं ये वो फूल हैं जो सिर्फ मतलबी मौसम में खिलते हैं रोक लगाती है दुनिया तमाम इन पर पर देखो मान ये इश्कबाज पक्के जो पाबंदियों में […]
काश भ्रष्टाचार न होता ,फिर भलों का दिल न रोता कानून ढंग से काम करता, काश भ्रष्टाचार न होता। लोकतंत्र भ्रष्ट न होता, रिश्वत का तो नाम न होता संसद ढंग से काम करता, काश […]
जो और कोई कह ना पाए कर ना पाए और कोई ऐसा जज्बा लिए संग में चलता है अकेला कोई। उसके पास अनूठी क्षमता और अनोखा ज्ञान है सदा ही कागज पर अपने रचता अलग […]
माँ तुम दिल में ठान लो कि मुझको दुनिया में लाओगी इस बार दुनिया कि मान कर मुझको नहीं मिटाओगी। क्या हक नहीं है मेरा माँ इस दुनिया में आने का क्या अरमान नहीं है […]
I TOLD UH GOD ONLY QUESTION ONE PLEASE TELL ME GOD WHAT IS THAT DAY HAPPEN WHY MY FATHER COME OUR HOME WHY HE LEFT MUMMA THAT DAY ALONE WHY THAT DAY I DON’T CRY […]
जमाने में रहे पर जमाने को खबर न थी ढिंढोरे की तुम्हारी आदत न थी अच्छे कामों का लेखा तुम्हारा व्यर्थ ही रह गया हमसे साथ तुम्हारा अनकहा सा कह गया जीतना ही सिखाया हारने […]
Please confirm you want to block this member.
You will no longer be able to:
Please note: This action will also remove this member from your connections and send a report to the site admin. Please allow a few minutes for this process to complete.