Author: Mikesh Tiwari

  • ऑंखें तेरी खुलीं

    ऑंखें तेरी खुलीं हैं पड़
    तू जाग कर जगा नहीं
    अपनी सुबह में भांपना
    मेरा हमसफ़र अब है कहाँ
    तू पीछे रह गया कहाँ

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